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मोदी सरकार और रेल अधिकारियों के बीच तनातनी क्यों?

मोदी सरकार और रेल मंत्रालय के अधिकारियों के बीच इन दिनों जबरदस्त तनातनी चल रही है। इस तनातनी के पीछे केंद्र सरकार का मंत्रालय की सभी सेवाओं को एक कॉडर में लाने का निर्णय है। दरअसल, सरकार ने रेल विभाग को चुस्त-दुरुस्त बनाने की नीयत से एक बड़ा निर्णय रेल मंत्रालय के अलग-अलग कॉडर को समाप्त कर केवल एक ही कॉडर रखने का फैसला लिया है।

रेलवे के अफसरों में सरकार के इस निर्णय से भारी अफरा- तफरी मच गई है। वर्तमान में रेल मंत्रालय के भीतर आठ अलग- अलग संवर्ग हैं जिन्हें मिलाकर सरकार इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस नाम से एक कॉडर करने का निर्णय ले चुकी है। सरकार के इस फैसले का विरोध बड़े पैमाने पर शुरू हो चुका है। सभी सेवाओं के अफसरों ने प्रतिदिन हजारों की संख्या में प्रधानमंत्री को ऐसा न करने की सलाह और अनुरोध करने वाले पोस्टकार्ड भेजने का फैसला लिया है।

खबर है कि रेल मंत्री के भरसक प्रयास के बाद भी रेलवे के अफसर कुछ सुनने को राजी नहीं हैं। खबर यह भी है कि यदि सरकार नहीं मानी तो रेल अफसर अपने अभियान को तेजी देने के लिए रेलयात्रियों से संपर्क करने का प्लान बना चुके हैं। हर संवर्ग के अफसर प्रतिदिन रेल में सफर कर यात्रियों को सरकार के इस फैसले से आने वाली समस्याओं, विशेषकर रेल यात्रा के असुरक्षित होने की जानकारी देंगे। अपने मैनेजमेंट गुरों के लिए ख्याति प्राप्त रेल मंत्री इस सबके चलते बेहद व्यथित बताए जा रहे हैं।

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