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तमिलनाडु की राजनीति में पिछले कई दशकों से अन्नाद्रमुक और द्रमुक का कब्जा रहा है। दोनों ही दलों के मध्य सत्ता को लेकर चलने वाले संघर्ष ने कई बार राज्य की कानून व्यवस्था को खतरे में डालने का काम किया है। हालात इतने तनावपूर्ण इन दलों के मध्य रहते आए हैं कि जो भी दल सत्ता में आता वह दूसरे के खिलाफ नाना प्रकार की जांचें शुरू कर बदले की कार्यवाही करने लगता। लेकिन अब यहां हालात बदलते नजर आ रहे हैं। राज्य की कमान द्रमुक नेता स्टालिन के हाथों में आते ही प्रतिशोध की राजनीति थमती नजर आने लगी है। स्टालिन ने कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम शुरू किया। इसके लिए उन्होंने अन्नाद्रमुक के नेताओं को भी अपनी टीम में शामिल कर सबको चौंका दिया था। अब स्टालिन ने अपनी पूर्ववर्ती डीएमके सरकार द्वारा राज्यभर के स्कूली बच्चों में मुफ्त वितरित किए जाने वाले साठ लाख स्कूली बस्तों की बाबत एक निर्णय ले सभी का दिल जीत लिया है। इन स्कूली बस्तों में अन्नाद्रमुक की संस्थापक स्वर्गीय जयललिता एवं पूर्व सीएम पलानीस्वामी की तस्वीरें छपी हैं। राज्य के नौकरशाहों का मानना था कि सरकार बदलने के बाद इन बस्तों को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा क्योंकि इनमें अन्नाद्रमुक नेताओं की फोटो छपी है। स्टालिन ने लेकिन फिजूलखर्चा बचाने के नीयत से इन सभी बस्तों को तत्काल स्कूलों में वितरित करने का आदेश दे सबको हैरत में डाल दिया है। इससे राज्यभर में स्टालिन की प्रशंसा के पुल बांधे जाने की खबर है।

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