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उत्तराखण्ड कांग्रेस कम्पैन कमेटी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता वापसी के लिए दिन-रात लगे हुए हैं। 73 बरस के रावत की सक्रियता से जहां सत्तारूढ़ भाजपा परेशान है तो वहीं कांग्रेस भीतर रावत विरोधियों की नींद भी उड़ी हुई है। रावत के करीबियों की मानें तो वे सुबह नौ बजे से लेकर रात दो बजे तक पार्टी की चुनावी सभाओं में हिस्सा लेने, कार्यकर्ताओं से मिलने और चुनावी रणनीति बनाने का काम करते हैं। रावत दरअसल किसी भी कीमत पर राज्य में कांग्रेस सरकार बनाने की ठान चुके हैं। गत दिनों दिल्ली में हुई पार्टी स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में लगभग 45 सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों के नाम पर गहन चिंतन मंथन हुआ। खबर है कि लगभग 35 सीटों पर प्रत्याशियों का नाम फाइनल कर भी लिया गया है। जिन सीटों पर चर्चा हुई उनमें से कुछ सीटें ऐसी भी हैं जिससे हरीश रावत के चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है। जानकारों का दावा है कि इनमें से किसी भी सीट पर रावत ने खुद की दावेदारी पेश नहीं की है। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि हरीश रावत इस बार अपनी पूरी ताकत पार्टी प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में लगाने जा रहे हैं। वे खुद किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे ताकि भाजपा उनको किसी एक सीट विशेष पर घेरने में कामयाब न हो सके। खबर यह भी जोरों पर है कि यदि चुनाव नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो रावत मुख्यमंत्री पद की दावेदारी अवश्य पेश करेंगे। यदि वे मुख्यमंत्री बनाए जाते हैं तो उनके किसी करीबी विधायक का इस्तीफा कराया जाएगा ताकि उपचुनाव के जरिए रावत विधायक बन सकें। रावत के कुछ करीबी नेताओं का कहना है कि हरीश रावत इस बार पहाड़ की किसी सुरक्षित सीट से मैदान में उतरने जा रहे हैं। ऐसों का दावा है कि रावत धारचुला विधानसभा से अपना पर्चा दाखिल करेंगे। ऐसी स्थिति में उनके चुनाव प्रचार और उन्हें जिताने की जिम्मेदारी पूर्व विधायक हरीश धामी की रहेगी। गौरतलब है कि धामी रावत के बेहद करीबी और विश्वस्त नेताओं में से एक हैं। 2014 में रावत के सीएम बनने बाद उन्होंने निसंकोच अपनी विधानसभा सीट रावत के लिए खाली कर दी थी। बाद में उन्हें रावत ने राज्य वन विकास निगम का अध्यक्ष बना पुरस्कृत भी किया था।

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