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Sargosian / Chuckles

कैप्टन के जरिए किसानों को साधने के संकेत

पंजाब के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के तेवर कांगे्स आलाकमान के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनते नजर आ रहे हैं। अमरिंदर सिंह को बगैर किसी बगावत राज्य की सत्ता से बेदखल करने में सफल रहा पार्टी नेतृत्व अब कैप्टन के सियासी दांव-पेंचों के कारण बैकफुट पर है। एक तरफ राहुल और प्रियंका गांधी की पसंद चलते प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए नवजोत सिंह सिद्धू ने खुद को सीएम न बनाए जाने से नाराज हो अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर कांगे्रस आलाकमान की भारी किरकिरी करा डाली है तो दूसरी तरफ अमरिंदर सिंह का केंद्रीय गृहमंत्री संग लंबी मुलाकात करना, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मिलना स्पष्ट संकेत दे रहा है कि भाजपा किसी न किसी रूप में अमरिंदर सिंह संग गठबंधन करने वाली है। चर्चा जोरों पर है कि कैप्टन या तो भाजपा में शामिल हो केंद्रीय मंत्रिमंडल अथवा किसी राज्य में राज्यपाल बनाए जा सकते हैं अथवा अपनी अलग पार्टी बना वे भाजपा संग गठबंधन कर आगामी विधानसभा चुनाव में ताल ठोंक सकते हैं। कैप्टन के बागी होते ही असंतुष्ट कांग्रेस नेताओं का जी-23 समूह भी एक्टिव हो चला है। वरिष्ठ कांग्रेसी कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी और गुलाम नबी आजाद ने एक बार फिर से पार्टी भीतर आंतरिक लोकतंत्र की बात उठा डाली है। खबर यह भी जोरों पर है कि किसान आंदोलन से त्रस्त भाजपा बजरिए कैप्टन इस दिशा में कुछ सार्थक करने का मन बना रही है। कहा जा रहा है कि कैप्टन को आगे कर सरकार किसान नेताओं संग वार्ता का नया दौर शुरू कर पांच राज्यों में चुनाव से ठीक पहले तीनों कृषि कानूनों की बाबत कुछ बड़ा फैसला ले सकती है। यदि ऐसा हुआ तो इसका सियासी लाभ कुछ हद तक भाजपा को मिल सकता है। दिल्ली के सत्ता गलियारों में चल रही कानाफूसी संकेत दे रही है कि भाजपा आलाकमान कैप्टन के सहारे एक तीर से कई निशाने लगाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

फिर पाला बदलने की सुगबुगाहटhttps://thesundaypost.in/sargosian-chuckles/then-the-smell-of-change/

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