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कांग्रेस का भले ही अब पहले जैसा जलवा न बचा हो, लेकिन यूपीए गठबंधन का अध्यक्ष पद वह हर कीमत पर पार्टी के कब्जे में रखना चाह रही है। कुछ दिन हुए अफवाहों का बाजार गर्म हुआ था कि सोनिया गांधी इस पद से मुक्ति चाह रही हैं और महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार जल्द ही यूपीए के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। इन अफवाहों का कांग्रेस ने तत्काल खंडन कर शरद पवार को तगड़ा झटका दे डाला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता को इतनी आसानी से इग्नौर लेकिन किया नहीं जा सकता। विपक्षी गठबंधन का चेहरा बनने को लालायित बताए जा रहे शरद पवार ने अब यूपीए के घटक दलों को साधने की कवायद शुरू कर दी है। इसके साथ ही वे उन गैर भाजपा-गैर कांग्रेसी दलों के शीर्ष नेताओं को भी शीशे में उतारने में जुट गए हैं जिन्हें न केवल भाजपा, बल्कि कांग्रेस से भी बराबर का परहेज है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी संग शरद बाबू के रिश्ते खासे प्रगाढ़ हैं। अब उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को साधने की कवायद शुरू कर दी है। चर्चा जोरों पर है कि एनसीपी और शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस को हाशिए में डालने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसकी शुरुआत होली के बाद मुंबई में आयोजित एक रैली से हो सकती है। इस रैली में एनसीपी और शिवसेना ने सपा को भी साथ आने का आमंत्रण दिया है।

खबर है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव उद्धव ठाकरे और शरद पवार संग मिलकर इस रैली का मंच साझा करेंगे। कांग्रेस को हाल फिलहाल तक इस रैली के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। इससे नाराज कांग्रेस इस वर्ष प्रस्तावित वृहद मुंबई महानगर पालिका चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी है।

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