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भाजपा बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी के तीन विधायक दल बदल कर भाजपा में शामिल होने के बाद अब विधानसभा में भाजपा के 77 विधायक हैं। जद(यू) के मात्र 45 विधायक हैं। ऐसे में प्रदेश भाजपा के नेताओं का मानना है कि गठबंधन सरकार का नेतृत्व उसके हाथों में होना चाहिए। जद(यू) इसके लिए कतई तैयार नहीं बताई जा रही है। पिछले कुछ अर्से तक यह खबर चर्चा का केंद्र बनी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति बनाया जा सकता है अथवा उन्हें राज्यसभा सदस्य बना केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा राज्य में अपनी सीएम नियुक्त कर सकती है। इन चर्चाओं के जोर पकड़ने पर जद(यू) ने खुलकर ऐसी किसी भी संभावना को तो सिरे से नकारा ही सीधे-सीधे भाजपा पर हमला भी करना शुरू कर दिया है। सम्राट अशोक की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में जद(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने साफ-साफ कहा कि नीतीश कुमार अपना टर्म पूरा करेंगे और जिन्हें भी बिहार का सीएम बनना है उन्हें अभी इंतजार करना होगा। इतना ही नहीं बढ़ती महंगाई को लेकर स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कह दिया है कि केंद्र सरकार को इस पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए। इससे नाराज प्रदेश भाजपा के नेताओं ने राज्य की शराबबंदी नीति और कानून व्यवस्था का मुद्दा उछाल दिया है। जानकारों का दावा है कि जद(यू) नेतृत्व ने तय कर दिया है यदि भाजपा राज्य सरकार के कामकाज में ज्यादा दबाव बढ़ाती है तो गठबंधन तोड़ राज्य में मध्यावधि चुनाव कराना ज्यादा बेहतर विकल्प होगा। खबर यह भी गर्म है कि जद(यू) कुछ नेता राजद संग गठबंधन का विकल्प भी तलाशने में इन दिनों जुटे हुए हैं।

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