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नेताओं का दल बदल का सिलसिला पिछले कुछ महीनों से ज्यादा दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनावों से पहले शुरू हुआ ये खेलल लोकसभा चुनाव तक जारी है। ऐसा ही भिंड जिले के पूर्व विधायक के साथ देखने को मिला है। चर्चा है कि चार बार विधायक रहे रसाल सिंह को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था तो वे भाजपा से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी के हाथी पर सवार हो गए थे। उनके साथ उनके सैकड़ों समर्थक भी बीएसपी में चले गए लेकिन अब रसाल सिंह का बसपा से मोहभंग हो गया है और उन्होंने बीते दिनों बसपा से त्यागपत्र भी दे दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्दी ही भाजपा में शामिल हो घर वापसी कर सकते हैं। रसाल सिंह ने मात्र छह महीने में ही बसपा को अलविदा कह भिंड जिला अध्यक्ष के नाम इस्तीफा लिखा और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इस्तीफे में लिखा कि वे व्यक्तिगत कारणों से पार्टी में सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं, स्वीकार किया जाए। यह भी खबर है कि रसाल सिंह के इस्तीफे की स्क्रिप्ट पीएम मोदी के मुरैना दौरे के बाद लिखी गई है। चर्चा है कि भिंड लोकसभा सीट पर भाजपा की स्थिति उतनी अच्छी नहीं हैं जितनी दिखाई जा रही है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसे समझ रहा है और पार्टी छोड़कर गए नेताओं की वापसी पर जोर दे रहा है। रसाल सिंह भी पार्टी के सीनियर नेता रहे हैं, वे चार बार विधायक रहे, दो बार चुनाव हारे यानी उन्हें लम्बा राजनीतिक अनुभव है। उनके क्षेत्र में उनका प्रभाव भी है। माना जा रहा है कि भाजपा के कहने पर ही रसाल सिंह ने बसपा से इस्तीफा दिया है।

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