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दिल्ली विधानसभा के चुनाव सिर पर हैं। भाजपा आलाकमान के लिए इन चुनावों का खासा महत्व है। गत् विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने जमकर बैटिंग की, लेकिन जीत केजरीवाल के हाथों लगी। आप सरकार ने नौकरशाही, उपराज्यपाल और केंद्र सरकार की तमाम अड़ंगेबाजी के बावजूद न केवल अपने सभी चुनावी वादों को अंजाम तक पहुंचाया है, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य में तो देश ही नहीं विदेशों में भी उसके कार्यों की धूम रही है। ऐसे में भाजपा आलाकमान को सबसे ज्यादा चिंता दिल्ली की है। खबर है कि पिछले दिनों कराए एक ओपिनियन पोल के बाद पार्टी थोड़ी राहत महसूस कर रही है। इस ओपिनियन पोल में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन उभरी है। खबर यह भी है कि भाजपा आलाकमान चुनाव पूर्व किसी भी नेता को बतौर मुख्यमंत्री चुनाव मैदान में न उतारने का मन बना चुका है। उसे डर है कि यदि ऐसा किया गया तो पार्टी के अति महत्वाकांक्षी नेताओं की आपसी रार चुनाव को डिरेल कर देगी। जानकारों की मानें तो विजय गोयल, हर्षवर्धन और मनोज तिवारी से इतर पार्टी आलाकमान शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी को चुनाव बाद यदि बहुमत मिलता है तो सीएम बना सकती है। इसके एक नहीं कई फायदे हैं। पहला पुरी का सिख होना है जो 2024 के आम चुनाव में पार्टी के लिए मददगार सिबत हो सकता है। साथ ही पूर्व नौकरशाह और पंजाबी होने के चलते मध्यम वर्ग के वोट बैंक को भी पार्टी के पक्ष में लाने में मदद मिलती है। बेचारे मनोज तिवारी को इस सबके चलते बड़ी मायूसी मिलनी तय है।

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