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Sargosian / Chuckles

नेताओं की रार से त्रस्त प्रियंका

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का जनाधार 1990 के बाद से लगातार घटता ही चला जा रहा है। पार्टी की आखिरी सरकार प्रदेश में 1989 तक थी। स्व. नारायण दत्त तिवारी 1988 से 1989 तक राज्य के अंतिम कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। इसके बाद प्रदेश में कभी भी कांग्रेस उबर नहीं पाई। अब पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री प्रियंका गांधी पूरे दमखम के साथ मृतप्राय प्रदेश संगठन में जान फूंकने का प्रयास कर रही है। ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ नारे के साथ राज्य की महिला मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल होती नजर आ रही प्रियंका को लेकिन प्रदेश के बड़े नेताओं का पूरा सपोर्ट मिलता नजर नहीं आ रहा है। ये नेता भले ही जनाधार के मामले में निल बट्टा सन्नाटा हों, इनका गुरुर इतना कि पार्टी और प्रियंका को मजबूत करने के बजाए एक-दूसरे की टांग खिंचाई कर जगहंसाई का काम करते ये सब नजर आ रहे हैं। कुछ दिन हुए पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह ने चुनाव आयोग से भेंट कर राज्य के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी को हटाए जाने की मांग की। ओंकारनाथ का कहना है कि अवस्थी निष्पक्ष नौकरशाह के बजाए भाजपा परस्त नौकरशाह हैं इसलिए आचार संहिता लगने के साथ ही उन्हें गृह विभाग के दायित्व से हटाना जरूरी है ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू अपने प्रवक्ता के इस एक्शन से खासे नाराज हो गए। उन्होंने बाकायदा पत्र लिखकर चुनाव आयोग से कह डाला कि ओंकारनाथ सिंह के नेतृत्व में जो शिष्टमंडल चुनाव आयोग से मिला था वह पार्टी का अधिकृत डेलिगेशन नहीं था। लल्लू ने आयोग से मांग कर डाली कि आयोग उन्हें, वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी और विधानसभा में कांग्रेस की नेता अराधना मिश्रा को मिलने का समय दे ताकि पार्टी की भावनाओं से आयोग को अवगत कराया जा सके। प्रदेश अध्यक्ष के इस पत्र बाद भारी बवाल मच गया। नाराज ओंकारनाथ सिंह ने तो प्रियंका गांधी को अपना इस्तीफा तक भेज दिया है। खबर जोरों पर है कि प्रियंका प्रदेश नेताओं की आपसी रार और तकरार से बेहद खफा हैं। खबर यह भी गर्म है कि उन्होंने अजय कुमार लल्लू को इस बात के लिए खासी फटकार भी लगाई है।

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