[gtranslate]

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इनदिनों भारी मानसिक और राजनीतिक दबाव में बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो उन्हें कांग्रेस आलाकमान ने स्पष्ट कह डाला है कि वे जल्द से जल्द अपने मंत्रिमंडल का पुर्नगठन कर सचिन पायलट के समर्थक विधायकों को उसमें एडजस्ट करें। राज्य के तीसरी बार सीएम बने गहलोत की सरकार अगले माह तीन बरस का कार्यकाल पूरा कर चौथे बरस में प्रवेश करेगी। वर्तमान में राज्य का मंत्रिमंडल 21 सदस्यीय है। 17 दिसंबर, 2018 को बनी सरकार में कुल 26 मंत्री बनाए गए थे। इनमें से तीन मंत्रियों-सचिन पायलट, विश्वेंद्र सिंह और रमेश चंद्र मीणा को जुलाई 2020 में मुख्यमंत्री गहलोत ने बगावत करने का आरोपी करार दे बर्खास्त कर डाला था। राज्य में अधिकतम 30 मंत्री हो सकते हैं। ऐसे में अभी 9 मंत्री पद खाली हैं जिन्हें भरने का दबाव गहलोत पर बढ़ता जा रहा है। पार्टी सूत्रों की माने तो सचिन पायलट अपने समर्थक 10 विधायकों को मंत्री बनाने पर अड़े हुए हैं। दूसरी तरफ गहलोत केवल 4 से 5 सचिन समर्थकों को मंत्री बनाने के लिए सहमत हैं। पायलट-गहलोत विवाद को सुलझाने के लिए बनाई गई कमेटी की सिफारिशें पिछले एक बरस से लागू नहीं हो सकी हैं। जानकारों की माने तो इसके चलते पायलट खेमे में एक बार फिर से भारी नाराजगी पसर चुकी है। खबर गर्म है कि पायलट ने कांग्रेस आलाकमान को साफतौर पर कह डाला है कि यदि समझौते की शर्तों को शीघ्र अमलीजामा नहीं पहनाया गया तो उनके पास पार्टी छोड़ने के अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा। जानकारों की माने तो सचिन इस बार स्वयं उपमुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते हैं। उनकी नजर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर टिकी है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह दोतासरा गहलोत सरकार में मंत्री भी हैं। ‘एक व्यक्ति-एक पद’ सिद्धांत के अनुसार उन्हें पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की बात पायलट कैंप करता आया है। यदि कांग्रेस आलाकमान सचिन को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपता है तो 2023 के विधानसभा चुनाव सचिन के चेहरे पर लड़े जाने का संकेत जाएगा जिसके लिए गहलोत राजी नहीं हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व कैसे राजस्थान कांग्रेस की अंतर्कलह को काबू करता है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD