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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल और केंद्र सरकार के मध्य रिश्ते खासे तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। रघुराम राजन के स्थान पर सितंबर 2016 में आरबीआई के गवर्नर बने पटेल को स्वयं प्रधानमंत्री मोदी की पसंद बताया जाता था। रघुराम राजन संग मोदी सरकार की पटरी ठीक से बैठ नहीं रही थी। पटेल की ताजपोशी के कुछ समय बाद तक वित्त मंत्रालय और आरबीआई के बीच मधुर संबंध रहे जो अब तनाव की चरम सीमा तक पहुंच चुके हैं। सबसे ज्यादा तानातनी तीन लाख करोड़ के उस रिजर्व फंड को लेकर है जो सरकार वक्ती तौर पर आरबीआई से उधार मांग रही है। पटेल इसके लिए तैयार नहीं। डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने खुलकर केंद्र सरकार पर दबाव डालने का आरोप लगा डाला है। हालांकि पिछले दिनों उर्जित पटेल ने पीएम और वित्त मंत्री संग लंबी मुलाकात की लेकिन सूत्रों की मानें तो इस मुलाकात से दोनों ही पक्षों को कुछ खास हासिल हुआ नहीं। चर्चा जोरों पर है कि यदि केंद्र सरकार आरबीआई के कामकाज पर हस्तक्षेप करना जारी रखती है तो उर्जित पटेल और विरल आचार्य इस्तीफा दे सकते हैं।

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