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कर्नाटक में बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बने अभी कुल चार महीने ही हुए हैं। लिंगायत समाज के बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा को यकायक पैदल कर भाजपा आलाकमान ने बोम्मई को राज्य की कमान गत् 20 अगस्त के दिन सौंप सबको हैरत में डालने का काम किया था। येदियुरप्पा की बरस्क बोम्मई का न तो राज्य में खास जनाधार है, न ही पार्टी के विधायकों में उनकी येदियुरप्पा समान पकड़ रही है। इसके चलते भले ही पार्टी आलाकमान के आदेश पर विधायकों ने उन्हें अपना नेता तो मान लिया लेकिन विधान दल और संगठन में इस निर्णय के चलते भारी असंतोष पसर गया है। अब यही असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। स्वयं बोम्मई ने अपने पद पर बने रहने पर शंका जाहिर कर दी है। गत दिनों येदियुरप्पा की तर्ज पर बोम्मई भी आंखों में पानी और भरे गले से यह कहते सुने गए कि ‘राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता है।’ दरअसल कर्नाटक भाजपा के कुछ दिग्गज बसवराज बोम्मई के खिलाफ खुलकर बोलने लगे हैं। हालात इतने विकट हो चले हैं कि राज्य के एक मंत्री मुलगेश निरानी ने तो घोषणा ही कर डाली कि 2013 के चुनाव पहले राज्य में नया सीएम पदासीन हो जाएगा। इतना ही मानो कम नहीं, एक अन्य कैबिनेट मंत्री ई ़एस ़ईश्वरकृपा ने तो यह भी कह डाला है कि निरानी जल्द ही राज्य के नए मुख्यमंत्री होने जा रहे हैं। राज्य की राजधानी बैंगलुरू में बड़ी चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य कारणों का बहाना लेकर हटाया जाएगा। कहा जा रहा है कि बोम्मई घुटने की बीमारी से ग्रस्त हैं। इन सारी अफवाहों से नाराज पार्टी आलाकमान ने ऐसे सभी नेताओं को सख्त चेतावनी जारी कर डाली है जिन पर मुख्यमंत्री को अस्थिर करने का आरोप लग रहा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो स्वयं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी अरूण सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2023 के चुनाव बोम्मई के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे। पार्टी आलाकमान के इस बयान बाद अब चर्चा है कि बोम्मई गुजरात की तर्ज पर अपने मंत्रिमंडल में आमूलचूल परिवर्तन की योजना बना रहे हैं। खबर गर्म है कि इस चलते सरकार में मौजूद येदियुरप्पा समर्थक खासे विचलित हो चले हैं।

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