Sargosian / Chuckles

मुख्य न्यायाधीश पर बदलता नजरिया

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर के कार्यकाल में वर्तमान मोदी सरकार और न्यायपालिका के मध्य रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे थे। उनके सेवानिवृत होने के पश्चात न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा मुख्य न्यायाधीश बने तो केंद्र सरकार और न्यायपालिका के संबंधों में गर्माहट महसूसी गई। इसी दौरान उत्तराखण्ड के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की उच्चतम न्यायालय में नियुक्ति पर केंद्र सरकार की असहमति, सोहराबुद्दीन केस से जुड़े महाराष्ट्र के जज लोया की मुत्यु को लेकर दायर पीआईएल तथा सुप्रीम कोर्ट में रोस्टर ड्यूटी से संबंधित मसलों को लेकर कॉलेजियम के चार वरिष्ठ जजों की नाराजगी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बाहर आई जिसके चलते मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न-चिÐ लगा। अब लेकिन जस्टिस मिश्रा को लेकर पब्लिक और मीडिया का परशेप्शन बदलने लगा है तो इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला कर्नाटक में येदुरप्पा सरकार को राज्यपाल द्वारा विश्वासमत के लिए दिए गए पंद्रह दिनों को सुप्रीम कोर्ट ने 48 घंटों में बदला जिसके चलते राज्य में भाजपा सरकार का पतन हो गया। दूसरा दिल्ली सरकार और एलजी के मध्य चल रही तकरार में सुप्रीम कोर्ट का निर्वाचित सरकार के पक्ष में फैसला देना और तीसरा सोशल मीडिया हब मामले में केंद्र सरकार पर न्यायालय की तीखी टिप्पणियां जिनके चलते सरकार इस मामले में बैकफुट पर आ गई। यह भी खबर है कि चीफ जस्टिस राममंदिर-बाबरी मस्जिद प्रकरण पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करने जा रहे। इन मुद्दों को लेकर अब मुख्य न्यायाधीश के प्रति आमजन, सोशल मीडिया और मुख्य धारा के मीडिया ने जहां राय बदली है वहीं सरकार और न्यायपालिका के मध्य एक बार फिर टकराव की स्थिति उत्पन्न होती नजर आ रही है।

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