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झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों खासे चिंतित बताए जा रहे हैं। कारण है राज्य की खुफिया पुलिस से मिल रही खबरें कि भाजपा उनकी सरकार को गिराने का जाल बुन रही है। दिसंबर 2019 में हुए विधानसभा चुनावों में हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी, एनसीपी और सीपीआई (एमएल) गठबंधन को पचास सीटों पर जीत मिली थी तो भाजपा गठबंधन 30 सीटों पर सिमट कर रह गया था। जेएमएम के पास 29 विधायक, कांग्रेस के 18 बाकी तीन घटक दलों के एक-एक विधायक हैं। खबर गर्म है कि भाजपा के निशाने पर कांग्रेस के वे 12 विधायक हैं जिन्हें राज्य मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल पाया है। इन 12 में से कम से कम 5 विधायकों को लेकर कांग्रेस आलाकमान निश्चिंत है कि वे किसी भी लोभ-लालच में फंसने वाले नहीं हैं। संकट उन सात विधायकों को लेकर है जो खरीदे जा सकते हैं। ऐसे विधायकों पर बकौल खुफिया पुलिस दबाव बनाया जा रहा है कि वे कांग्रेस विधान दल से बगावत कर विधानसभा में एक अलग गुट बनाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष पर दबाव बनाएं। यदि ऐसा हुआ तो दलबदल कानून लागू नहीं हो पाएगा। खबर है कि मुख्यमंत्री ने इस बाबत विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्रनाथ महतो संग लंबी मंत्रणा की है। जानकारों का दावा है कि महतो इस गुट को मान्यता देने के बजाए इनकी सदस्यता को रद्द कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में मामला अदालत पहुंच जाएगा। कुल मिलाकर हेमंत सोरेन सरकार पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। पांच राज्यों के चुनाव नतीजों बाद झारखण्ड में ‘खेला’ खेले जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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