केंद्र सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात वरिष्ठ नौकरशाहों के मध्य इन दिनों सबसे ज्यादा चिंता सुप्रीम कोर्ट में चल रहे दो मामलों को लेकर बताई जा रही है। दिल्ली दरबार इन दो मामलों को लेकर सहमा हुआ है। पहला मामला सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने का है जिसको वर्मा ने अदालत में चुनौती दी है। यदि सुप्रीम कोर्ट वर्मा की छुट्टी वाले आदेश को रद्द करता है तो वर्मा अगले दो माह तक सीबीआई प्रमुख बने रहेंगे। जनवरी में सेवानिवृत्त होने जा रहे वर्मा इन दो महीनों के दौरान सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। बहुतों को आशंका है कि वे राफेल विमान सौदे पर जांच शुरू करने के आदेश दे सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो चुनाव से ठीक पहले यह भाजपा और केंद्र सरकार के लिए बड़े संकट का कारण बन जाएगा। दूसरा मामला राफेल सौदे को ही लेकर है जिस पर भी सुर्पीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। यदि कोर्ट इस मामले में दायर जनहित याचिकाओं की मांग स्वीकार कर सीबीआई अथवा किसी जज की गिरानी में जांच कराए जाने का आदेश देती है तो यह उन लोगों की जीत होगी जो इस सौदे में बड़े भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं। चुनावी वर्ष में केंद्र सरकार के आला नौकरशाह इस सब को लेकर खासे आशंकित और भयभीत बताए जा रहे हैं।

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