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पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य बिहार में जहरीली शराब पीने से इस वर्ष 70 से अधिक लोगों की मौत हो गई। राज्य में शराब पर प्रतिबंध के बावजूद इसकी अवैध बिक्री के धंधे ने बिहार में एक उद्योग का रूप ले लिया है। ऐसे में चर्चा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शराबबंदी का फैसला वापस लेना पड़ेगा। फैसला कब वापस हो, इसकी टाइमिंग का सवाल है लेकिन सैद्धांतिक रूप से इसकी वापसी का माहौल बन गया है। अब तक नीतीश कुमार इस फैसले पर इस वजह से कायम रह पाए थे क्योंकि उनकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी का उनको समर्थन था। राष्ट्रीय जनता दल भी जब सरकार में शामिल रही तब तक उसने खुलकर इसका विरोध नहीं किया। उसके नेताओं ने छिटपुट बयान दिए लेकिन इस कानून को वापस लेने के लिए दबाव नहीं बनाया। मगर अब नीतीश पर अंदर और बाहर दोनों तरफ से दबाव है। उनकी सहयोगी राजद के नेता इस फैसले को वापस करने का दबाव बना रहे हैं तो अब भाजपा भी खुल कर कह रही है कि फैसला रद्द होना चाहिए। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के गृह क्षेत्र छपरा में कथित तौर पर जहरीली शराब से करीब 80 लोगों की मौत के बाद शराबबंदी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल लालू प्रसाद की पार्टी के साथ दोबारा जाने के बाद नीतीश कुमार की सरकार ने शराबबंदी कानून में कई तरह की ढील दी। गिरफ्तारी के प्रावधानों में भी छूट दी गई। अब अगला चरण कानून की वापसी है। जानकार सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार खुद हो सकता है कि फैसला वापस न करें लेकिन वे बहुत जल्दी, उम्मीद से जल्दी सत्ता तेजस्वी यादव को सौंपने वाले हैं। अगले साल मार्च में ही तेजस्वी मुख्यमंत्री हो सकते हैं और तब इस बारे में उनकी सरकार फैसला करेगी। जो हो अब इस कानून की मियाद ज्यादा नहीं दिख रही है।

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