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यूं तो ऊपरी तौर पर कहा, सुना और समझा जा रहा है कि नीतीश कुमार और भाजपा के मध्य अब सब कुछ सामान्य हो चला है। यह भी समझाया जा रहा है कि लोकसभा सीटों से जुड़ा विवाद भी अब सुलझ चुका है लेकिन कहीं न कहीं कुछ ऐसा भी चल रहा है जो इशारा कर रहा है कि नीतीश और भाजपा का साथ लंबा नहीं रहने वाला। सूत्रों की मानें तो चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को आगे कर नीतीश यूपीए गठबंधन संग अपना रिश्ता वापस जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। पीके ने पिछले दिनों लालू यादव के कुनबे को मनाने का प्रयास किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अब वे कांग्रेस अध्यक्ष को साध रहे हैं। दिल्ली दरबार में बड़ी चर्चा है कि नीतीश प्रायश्चित के तौर पर जनता दल (यू) का कांग्रेस में विलय करने तक को राजी हैं बशर्ते बिहार में उनका राज बरकरार रहे। पीके का दावा है कि यदि नीतीश कांग्रेस में आ जाते हैं तो बिहार में दशकों बाद कांग्रेस की अपनी सरकार होगी। संकट लेकिन यह है कि लालू यादव इसके लिए कतई तैयार नहीं जिनके चलते राहुल गांधी धर्मसंकट में फंसे हैं कि एक विश्वसनीय साथी का साथ दें या फिर नीतीश पर भरोसा करें। दूसरी तरफ नीतीश कुमार भी अपने इस दांव के जरिए भाजपा आलाकमान पर जबरदस्त दबाव बनाए हुए हैं।

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