एनडीए गठबंधन में दरार काफी अर्सा पहले से ही पड़नी शुरू हो गई थी। पहले तेलगु देशम पार्टी ने साथ छोड़ा। अब शिव सेना का अलग होना तय लग रहा है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिव सेना के अठारह सांसद अनुपस्थित रहे। पहले पार्टी व्हिप जारी कर सांसदों को सरकार के समर्थन में मतदान करने को कहा था। बाद में पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर वे सदन से अनुपस्थित रहे। विश्वासमत हासिल करने के बाद मुंबई पहुंचे भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संकेत दिए कि पार्टी आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने पर विचार कर रही है। इसी तरह बिहार में एनडीए की सहयोगी लोकसमता पार्टी भी गठबंधन से बाहर का रास्ता खोजती नजर आ रही है। कारण है पार्टी के प्रमुख और केंद्रीय राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा के नीतीश कुमार संग अहसज संबंध। कुशवाहा की पार्टी ने 2015 में तीन लोकसभा सीटों पर विजय पाई थी जबकि नीतीश की जनता दल (यू) मात्र दो सीटों पर जीती थी। अब कुशवाहा 2015 के सीट शेयरिंग फॉर्मूले को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। यह नीतीश कुमार के भाजपा संग हो लेने बाद संभव नहीं है। दूसरी तरफ यदि कुश्वाहा लालू प्रसाद यादव संग गठजोड़ करते हैं तो जातिगत समीकरणों का उन्हें फायदा मिलगा। सूत्रों की मानें तो जल्द ही कुशवाहा की पार्टी एनडीए गठबंधन से अलग हो सकती है।

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