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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री इन दिनों भारी दुविधा में बताए जा रहे हैं। इस बार उनकी दुविधा का कारण केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां और भाजपा न होकर शिवसेना की हिंदुत्ववादी विचारधारा है जिस पर उद्धव के चचेरे भाई राज ठाकरे ने प्रहार करना शुरू कर शिवसेना भीतर खलबली मचा दी है। गत् दिनों राज्य के पूर्व सीएम देवेंद्र फणनवीस ने यह कह डाला कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय वे स्वयं घटना स्थल पर बतौर रामसेवक मौजूद थे लेकिन हिंदुत्व की बात करने वाली शिवसेना का कोई कार्यकर्ता वहां नहीं था। फणनवीस के इस बयान बाद राज ठाकरे ने भी शिवसेना के हिंदुत्व पर अपना निशाना साध लिया। इससे तिलमिला कर शिवसेना ने बकायदा प्रमाण जारी करते हुए खुला ऐलान कर दिया कि बाबरी मस्जिद का गुंबद तोड़ने वाले उसके शिव सैनिक ही थे। अपनी विचारधारा पर प्रहार से क्रोधित हो पार्टी ने ऐसा कह तो डाला लेकिन इस चलते उसकी गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस बैकफुट पर आ गई हैं। इन दोनों ही दलों का कोर वोट बैंक राज्य का मुस्लिम मतदाता है। अब यदि ये दोनों दल शिव सेना की आलोचना करते हैं तो सरकार के गिरने का खतरा बढ़ जाता है और यदि खामोश रहते हैं तो मुस्लिम मतदाता हाथ से निकल सकता है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही उद्धव ठाकरे संग इन दोनों दलों के नेता मिलने जा रहे हैं ताकि बीच का कोई रास्ता निकाला जा सके।

 

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