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सहारनपुर से किस्मत आजमाएंगे मसूद

उत्तर प्रदेश की सभी अस्सी लोकसभा सीटों में से पश्चिमी यूपी की सहारनपुर सीट अहम मानी जाती रही है। इस सीट पर पूरे देश की नजरें टिकीं रहती हैं। गठबंधन में ये सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है और कांग्रेस नेता इमरान मसूद का दावा सबसे मजबूत भी है। इमरान मसूद की गिनती पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेताओं में होती है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इमरान मसूद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया तो कुछ महीने पहले वो फिर से कांग्रेस में वापसी कर गए थे। तभी से इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि इमरान मसूद को कांग्रेस सहारनपुर से मैदान में उतार सकती है जो अब सच होती दिख रही है। असल में इसी हफ्ते समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग का ऐलान हो गया है। इस ऐलान के बाद कहा जा रहा है कि सहारनपुर से इमरान मसूद को कांग्रेस अपना उम्मीदवार बना सकती है। कांग्रेस के कई नेता भी यही चाहते हैं कि इमरान मसूद पर ही दांव लगाया जाए। यहां तक कहा जा रहा कि इमरान मसूद का नाम लगभग फाइनल हो गया है बस मुहर लगनी बाकी है। गौरतलब है कि पश्चिमी यूपी की कई और सीटों पर भी इमरान मसूद का अपना प्रभाव है। मुस्लिम वोटों पर इमरान मसूद की मजबूत पकड़ मानी जाती है। इमरान मसूद 2007 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मुजफ्फराबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधायक बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने कांग्रेस का हाथ पकड़कर लोकसभा पहुंचने का सपना देखा, लेकिन उनका ये सपना अधूरा रह गया था। 2014 तब बीजेपी के राघव लखनपाल सांसद बने और इमरान मसूद दूसरे नंबर पर रहे। इसके बाद 2019 में मसूद ने लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी किसमत ने साथ नहीं दिया और हार का मुंह देखना पड़ा। सहारनपुर लोकसभा सीट पर 2019 में बसपा के फजलुर्रहमान चुनाव जीते थे। इसलिए बसपा फिर इस सीट को जीतना चाहती है, वहीं बीजेपी बसपा से इस सीट को छीनना चाहती है। ऐसे में बसपा और भाजपा का प्रत्याशी कौन होगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं, वहीं देखना होगा कि आखिर कब तक कांग्रेस सहारनपुर में अपने प्रत्याशी की घोषणा करती है।

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