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दिल्ली में उपराज्यपाल और आम आदमी पार्टी के बीच कुछ अर्से शांति रहने के बाद फिर से तलवारें बाहर निकल चुकी हैं। कोविड महामारी के चलते पिछले कुछ अर्से के दौरान एलजी और सीएम एक टीम की तरह काम करते नजर आने लगे थे। केजरीवाल ने तो इस महामारी से लड़ने के लिए दिल्ली सरकार को लगातार मदद पहुंचाने पर केंद्र सरकार को कई मौकों पर सराहा भी लेकिन यह ‘शांतिकाल’ अब समाप्त होता नजर आ रहा है। जानकारों की मानें तो एलजी एक बार फिर से उन मुद्दों पर हस्तक्षेप करने लगे हैं जो दिल्ली सरकार के अधीन आते हैं। पिछले दिनों दिल्ली में हुए दंगों की अदालत में पैरवी करने वाले वकीलों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और उपराज्यपाल एक बार फिर आमने-सामने हैं। दरअसल दिल्ली सरकार अदालत में इन मामलों के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर अपनी मर्जी के नियुक्त करना चाहती है तो एलजी दिल्ली पुलिस की पसंद के वकील नियुक्त करने पर जोर दे रहे हैं। सरकार का मानना है कि वकीलों की नियुक्ति करना पूरी तरह उसके अधिकार क्षेत्र का मामला है इसलिए एलजी का इस पर दखल देना गैरकानूनी है।

आप सांसद संजय सिंह ने तो खुलकर एलजी की नीयत पर शंका जाहिर कर डाली है। उनका दावा है कि चूंकि दिल्ली दंगों में कई भाजपा नेता फंस रहे हैं इसलिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर एलजी जानबूझकर ऐसे वकील नियक्त करना चाहते हैं जो मुकदमें की ठीक तरीके से पैरवी न करें ताकि भाजपा नेताओं को बचाया जा सके।

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