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आंध प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी के लिए आने वाला समय खासा मुश्किलों भरा होने जा रहा है। 2012 में सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप के चलते हिरासत में लिए गए रेड्डी पर मनी लाॅन्ड्रिग से लेकर अपने पिता के शासनकाल में खनन पट्टे, सरकारी टेंडर आदि में भारी घोटाला करने के कई मामलों की जांच सीबीआई और ईडी कर रही है। हालांकि जगन मोहन रेड्डी इन आरोपों को अपने खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र कह खारिज करते आए हैं लेकिन धीरे-धीरे उन पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। रेड्डी ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश एनवी  रमन्ना के खिलाफ बेहद संगीन आरोप लगाते हुए एक पत्र मुख्य न्यायाधीश को भेजा। इस पत्र को बकायदा प्रेस काॅफ्रेंस कर रेड्डी के राजनीतिक सलाहकार ने मीडिया को जारी कर डाला था। सुप्रीम कोर्ट ने लेकिन इस पत्र पर कोई कार्यवाही न करने का फैसला ले लिया है। कोर्ट की एक ‘आंतरिक जांच’ में इन आरोपों को गलत पाया गया। इसके बाद अगले माह रिटायर होने जा रहे मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने अपने उत्तराधिकारी के बतौर जस्टिस एवी रमन्ना के नाम की संस्तुति केंद्र सरकार को भेज दी। राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा है कि न्यायमूर्ति रमन्ना के चीफ जस्टिस बनने के बाद जगन रेड्डी की मुश्किलों में भारी इजाफा हो सकता है। रेड्डी ने न्यायमूर्ति रमन्ना पर आरोप लगाया था कि वे जगन को फंसाने के लिए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जजों पर दबाव डालते हैं। उन्होंने यह आरोप भी अपने पत्र पर लगाया कि जस्टिस रमन्ना के दबाव में हाईकोर्ट के कुछ जज लगातार उनकी सरकार के खिलाफ फैसले दे रहे हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आने वाले दिनों में जगन रेड्डी के खिलाफ चल रहे मामलों में तेजी आ सकती है।

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