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दो महीने से भी कम समय में केसी त्यागी की जरूरत प्रमाणित हो गई है। जदयू के सर्वोच्च नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनको पार्टी का विशेष सलाहकार और मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने पिछले दिनों इसकी घोषणा की। उनकी नई नियुक्ति के साथ ही यह सवाल उठा है कि आखिर उनको राष्ट्रीय टीम से अलग ही क्यों किया गया था? अगर वे खुद भी छोड़ना चाहते थे तब भी पार्टी को यह ध्यान रखना चाहिए था कि नीतीश कुमार को राष्ट्रीय राजनीति करनी है और वे देश भर की विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने की मुहिम चला रहे हैं तो उसमें दूसरे किसी भी नेता से ज्यादा केसी त्यागी की जरूरत है। तभी कह सकते हैं कि जदयू ने बहुत कम समय में भूल सुधार की और उनको अहम पद पर नियुक्त किया। असल में केसी त्यागी समाजवादी राजनीति का सबसे जाना-पहचाना चेहरा हैं। देश की लगभग सभी पार्टियों के बड़े नेताओं के साथ उनके दशकों पुराने निजी संबंध हैं। नीतीश कुमार की विपक्ष को एकजुट करने की राजनीति में वे कई पार्टियों को जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। गौरतलब है कि नीतीश के अभियान की शुरुआत हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला से मुलाकात से हुई थी। उस समय नीतीश के साथ केसी त्यागी मौजूद थे। चौटाला परिवार के साथ उनके निजी संबंध हैं। इसी तरह समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के परिवार के साथ भी उनके निजी संबंध हैं। समाजवादी राजनीति करने वाली पार्टियों में सपा ही अभी कांग्रेस के नेतृत्व वाले संभावित गठबंधन से दूरी बनाई हुई है। केसी त्यागी यह दूरी मिटा सकते हैं। इसके अलावा उनकी एक बड़ी उपयोगिता यह है कि वे राष्ट्रीय राजधानी में मीडिया में जदयू की मजबूत उपस्थिति बनाए रख सकते हैं।

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