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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बगावती तेवरों को अब पार्टी आलाकमान अधिक सहने को तैयार नहीं बताया जा रहा है। खबर जोरों पर है कि जी-23 समूह में शामिल हुड्डा के पर कतरने की पूरी तैयारी कर ली गई है। दरअसल, प्रदेश में भाजपा सरकार इस वक्त बेहद अस्थिर हो चली है। किसान आंदोलन के चलते सरकार को समर्थन दे रही जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत्र चैटाला पर समर्थन वापस लेने का जबरदस्त दबाव है। पार्टी के 7 विधायक इस मुद्दे पर बगावती तेवर अपना चुके हंै। इन विधायकों के साथ ही खट्टर सरकार के साथ खड़े निर्दलीय विधायक भी किसान आंदोलन का दबाव महसूस कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो ये सभी विधायक कांग्रेस को समर्थन देने का मन बना चुके हैं लेकिन भूपेंद्र हुड्डा के चलते पार्टी आलाकमान निर्णय नहीं ले पा रहा है। हुड्डा इस समय राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता पद पर काबिज हैं। उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा राज्यसभा सदस्य हैं। एक ही परिवार के पास दो महत्वपूर्ण पद होने के बाद भी हुड्डा चाहते हैं कि पार्टी उनके पुत्र को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी बना डाले। इतना ही नहीं खट्टर सरकार गिरने की अवस्था में वे खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। पार्टी आलाकमान किसी भी सूरत में प्रदेश कांगेस की कमान दोबारा हुड्डा परिवार को सौंपने के लिए तैयार नहीं है। हुड्डा जननायक जनता पार्टी के दुष्यंत चैटाला संग भी समझौते के लिए राजी नहीं बताए जा रहे हैं। क्योंकि भविष्य में हरियाणा की राजनीति में दुष्यंत चैटाला उनके पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को पछाड़ने की क्षमता रखते हैं। अफवाहों का बाजार गर्म है कि जल्द ही हुड्डा को पार्टी बाहर का रास्ता दिखा सकती है। चर्चा इस बात की भी है कि स्वयं हुड्डा कांग्रेस छोड़ अपनी पार्टी का गठन करने जा रहे हैं।

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