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राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के लिए आरंभ से ही कहा जा रहा है कि यह भारत के साथ-साथ कांग्रेस को जोड़ने के लिए है, लेकिन इंदौर से यात्रा के निकलने के बाद भी कांग्रेसियों के दिल जुड़ते नजर नहीं आए। दरअसल हुआ यूं कि विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग गुटों के नेता पूरे समय यह जताने-बताने का प्रयास करते रहे कि यात्रा के लिए सबसे ज्यादा मेहनत उन्होंने ही की है। कुछ ने मौका मिलते ही केंद्रीय नेताओं के समक्ष अपने प्रतिस्पर्धी नेताओं को नीचा दिखाने का भी कोई मौका नहीं छोड़ा। कई जगह ये दृश्य नजर आए। यात्रा जब ग्रामीण क्षेत्र में थी, तब वरिष्ठ नेताओं के ये संवाद भी सुने गए कि ‘अब आप लोग ही कर लो, मैं तो घर निकल रहा हूं।’ पदाधिकारियों को पूरा माजरा समझ भी आ रहा था, लेकिन स्थिति न बिगड़े इसलिए वे चुप्पी साधे आगे बढ़ते रहे। गौरतलब है कि कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ मध्य प्रदेश में आने से पहले कांग्रेसियों में जो जोश नजर आ रहा था, वह जोश यात्रा के इंदौर पहुंचते ही थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बदलता गया। यात्रा इंदौर पहुंचने पर जब राहुल गांधी ने पैदल चलना शुरू किया तो इंदौरी नेताओं ने शुरू में खूब जोश दिखाया, लेकिन यात्रा जैसे- जैसे अगले चरणों में पहुंचती गई, पुराने चेहरे गायब होकर नए चेहरे जुड़ते गए। इंदौरी नेताओं ने यात्रा के पहले ही यह बात समझ ली थी कि फोटो और फुटेज सुबह 6 से 9 बजे के बीच ही सबसे ज्यादा बनते हैं। इसलिए इस दौरान सबसे ज्यादा सक्रियता भी नेताओं ने दिखाई। बाद में जैसे ही अपने क्षेत्र से यात्रा दूसरे क्षेत्र में पहुंची, धीरे से यात्रा से दूर होकर वाहन में बैठ गए। यात्रा के साथ शुरू से जुड़े दिल्ली के एक नेता की टिप्पणी थी ये फोटो वाला जोश है बस इतनी देर ही साथ रहता है।

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