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राज्यसभा सांसद सुब्रहमण्यम स्वामी एक जमाने में गांधी परिवार के बेहद करीबी हुआ करते थे। स्व ़ राजीव गांधी संग उनकी दोस्ती के किस्से कांग्रेस नेता अक्सर सुनाते रहते हैं। सोनिया गांधी संग लेकिन स्वामी की पटरी नहीं बैठी। नतीजा वे पूरी तरह से भाजपामय हो गएा। वे सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेसियों के खिलाफ ‘नेशनल हैराल्ड’ अखबार घोटाले पर कोर्ट भी जा पहुंचे हैं। भाजपा ने लेकिन उन्हें ना तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में लिया, ना ही संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। इसके पीछे स्वामी को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा नापसंद किया जाता बताया जाता है। अब लेकिन शाह के विचार बदले हैं। पिछले दिनों उन्होंने स्वामी संग चाय पर विस्तार से चर्चा की। खबर है कि इस चर्चा के दौरान ही उन्होंने स्वामी को महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाने का प्रस्ताव रखा। जानकारों की माने तो स्वामी ने शाह के प्रस्ताव को यह कहते अस्वीकार कर दिया कि वे सक्रिय राजनीति में अभी बने रहना चाहते हैं। यह देखा जाना बाकी है कि शाह उन्हें संगठन में कुछ जिम्मेदारी देते हैं या फिर स्वामी का वनवास जारी रहेगा।

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