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पश्चिम बंगाल में हर कीमत पर सरकार बनाने को लालायित भाजपा भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली पर डोरे डालने में जुटी बताई जा रही है। खबर गर्म है कि तमाम प्रयास बाद भी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने का सपना बगैर एक मजबूत नेता के पूरा होते नजर नहीं आ रहा है। चुनाव पूर्व सामने आए दो महत्वपूर्ण सर्वेक्षणों में एक बार फिर से ममता सरकार की वापसी होती साफ नजर आ रही है। ऐसे में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व हर कीमत में सौरव गांगुली को पार्टी में शामिल करने की कवायद में जुटा हुआ है लेकिन गांगुली अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर राजनीति में उतरने के लिए तैयार नहीं बताए जा रहे हैं। 7 मार्च को पीएम की रैली में गांगुली को लाने के सारे प्रयास विफल रहे। हालांकि मिथुन चक्रवर्ती की उपस्थिति ने थोड़ा समा बांधा जरूर लेकिन गांगुली को देखने उमड़ी जनता निराश हो गई। जानकारों का दावा है कि हार्ट की समस्या से ग्रसित गांगुली से मिलने जब तृणमूल नेता ममता बनर्जी अस्पताल पहुंची थी तभी कुछ ऐसा हुआ जिसके चलते गांगुली ने राजनीति में न जाने का मन बना दिया। हालांकि खुले तौर पर उन्होंने भाजपा को अभी तक इंकार नहीं किया है लेकिन संभावना प्रबल है कि वे भाजपा में शामिल नहीं होने जा रहे हैं। पंश्चिम बंगाल में सौरभ गांगुली की बड़ी फैन फाॅलोईंग बताई जाती है। दूसरी तरफ भाजपा के पास ममता की काट के लिए एक भी मजबूत चेहरा प्रदेश भाजपा में नहीं है।   उसके ज्यादातर बड़े चेहरे तृणमूल से बगावत कर आए वे नेता हैं जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप स्वयं भाजपा ही लगाती रही है। फिर चाहे सुवेंदु अधिकारी हों या मुकुल राय, सभी दागी हैं। खांटी भाजपाइयों में एक भी नाम ऐसा नहीं जो ममता बनर्जी का मुकाबला कर सकता हो। सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी के लगातार बंगाल दौरे और जनसभाएं भी अनुकूल माहौल तैयार करती नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में यदि सौरव का साथ नहीं मिल पाया तो दीदी को हरा पाना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।

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