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कांग्रेस का अध्यक्ष इस वर्ष जून में चुना जाना तय हो चुका है। अंतरिम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों के चलते अब एक्टिव राजनीति से रिटायर होने की मंशा कई बार पार्टी नेताओं के समक्ष रख चुकी हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने न केवल पद छोड़ा, बल्कि किसी गैर गांधी को पार्टी की कमान सौंपे जाने की बात भी कह डाली थी। तब से पार्टी बगैर फुल टाइम अध्यक्ष रामभरोसे चल रही है। कभी सोनिया गांधी के हनुमान कहे जाने वाले गुलाम नबी आजाद गांधी परिवार की मेहरबानी के चलते अपनी राजनीति चलाने वाले आनंद शर्मा समेत 23 वरिष्ठ कांग्रेसियों ने इस उहापोह की स्थिति से खिन्न हो एक पत्र लिख डाला। गांधी परिवार और उसके करीबियों ने इसे बगावत करार दिया लेकिन दबाव में वे जरूर आ गए। नतीजा जून 2021 तक हर हालात में पार्टी को फुल टाइम अध्यक्ष दिए जाने का प्रस्ताव गांधी परिवार की सहमति से कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने पिछले दिनों पास तो कर दिया लेकिन राहुल गांधी दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनेंगे या नहीं इस पर स्वयं परिवार भीतर असमंजस की बात सामने आ रही है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि चाहे कुछ भी हो नेतृत्व अंतः राहुल को ही संभालना पड़ेगा। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसके लिए बकायदा अपने राज्यों से राहुल गांधी के समर्थन में प्रस्ताव भेजने शुरू कर डाले हैं। आने वाले दिनों में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ऐसे ही प्रस्ताव कांग्रेस वर्किंग कमेटी के पास भेजने जा रहे हैं। लेकिन खबर है कि राहुल गांधी अभी तक वापसी के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। ऐसे मंे यह देखना दिलचस्प होगा कि यदि वे अपनी बात पर अड़े रहते हैं तो किस गैर गांधी कांगे्रसी के सिर पर पार्टी अध्यक्ष का ताज पहनाया जाएगा।

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