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कांग्रेस आलाकमान पर चिट्ठी बम के जरिए निशाना साधने वाले 23 बड़े नेता जिन्हें ‘जी-23’ के नाम से पुकारा जा रहा है, धीरे-धीरे वापस गांधी परिवार की शरण में आते जा रहे हैं। इस चिट्ठी में दस्तखत करने वाले केरल कांग्रेस के शशि थरूर हों या फिर उत्तर प्रदेश के जतिन प्रसाद, सभी ने अपने सुर नरम कर डाले हैं। लेकिन छह बड़े नेता अभी भी पार्टी आलाकमान के काबू में नहीं आ पाए हैं। 10 जनपथ से लेकर 24 अकबर रोड तक इन्हीं छह नेताओं की बाबत नाना प्रकार की कयासबाजियों का दौर चल रहा है। ये नेता हैं- कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद, भूपिंद्र सिंह हुड्डा, मनीष तिवारी, विवेक तन्खा, आनंद शर्मा। खबर है कि ये सभी छह नेता आजाद के नेतृत्व में 2 मई को आने वाले पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद गांधी परिवार पर बड़ा राजनीतिक हमला बोल सकते हैं। आजाद के बारे में पुख्ता खबर है कि वे जम्मू-कश्मीर में अपनी पार्टी लाॅन्च करने का मन बना चुके हैं। कहा जा रहा है कि आजाद और पीएम मोदी की निकटता एक बड़ा कारण है जिसके चलते हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज भूपिंद्र सिंह हुड्डा गांधी परिवार से दूर हो चले हैं। जानकारों का दावा है कि ईडी और सीबीआई के जाल में फंसे हुड्डा जान-बूझकर हरियाणा सरकार को गिराने के कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों को नहीं मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि फरवरी में मानेसर जमीन घेटाले को लेकर हुड्डा की गिरफ्तारी होने जा रही थी। तब आजाद ने भाजपा से बात कर हुड्डा की जान बचाई। यही कारण है कि हुड्डा वही करेंगे जो आजाद चाहेंगे। अब सब कुछ पांच राज्यों के नतीजों पर निर्भर करता है। यदि असम और केरल में कांग्रेस का प्रदर्शन ठीक रहा तो स्थिति अलग होगी। यदि प्रदर्शन खराब रहा तो निश्चित ही असंतुष्ट कांग्रेसी कोई बड़ा धमाल अवश्य करेंगे।

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