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शिवसेना और भाजपा के रिश्ते अब कभी न सुधरने की कगार पर पहुंच चुके हैं। कभी एक-दूसरे के अत्यंत निकट रहे दोनों दलों के मध्य सत्ता को लेकर खटास 2019 के विधानसभा चुनावों को लेकर पैदा हुई। दोनों दलों ने चुनाव पूर्व गठबंधन बना यह चुनाव लड़ा था। 288 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, कांग्रेस को 44 और राष्ट्रवादी कांग्रेस को 54 सीटें मिली। शिवसेना ने भाजपा पर तब यह आरोप लगाते हुए गठबंधन छोड़ दिया था कि चुनाव बाद मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा ऐसा आश्वासन स्वयं भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिया था जिसे लागू करने के लिए भाजपा तैयार नहीं हो रही है। इसके बाद कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना ने सरकार बना डाली। तब से ही भाजपा संग शिवसेना के रिश्ते बिगड़ते चले जा रहे हैं और उसके नेताओं पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा कसने लगा है। गत् दिनों इस पर शिवसेना ने अपने मुख्य पत्र ‘सामना’ में तीखी टिप्पणी करते हुए लिख डाला ‘हर-हर मोदी, घर-घर मोदी’ के नारे को जोड़ कर हर कोई हर-हर ईडी, घर-घर ईडी’ का नारा दे रहा है तो लोगों को बगावत करनी ही पड़ेगी। जानकारों की मानें तो महाराष्ट्र के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल समेत कई भाजपा नेता विपक्षी दलों को इन केंद्रीय एजेंसियों का भय दिखाते रहते हैं। इस बीच खबर है कि ईडी ने सत्रह साल पुराने किसी लेन-देन को लेकर ‘नर्मदा बचाओ’ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर पर भी मनी लॉन्ड्रिग का मामला दर्ज कर डाला है। ईडी पर विशेष रूप से भाजपा विरोधी लोगों पर मुकदमे दर्ज करने चलते ‘सामना’ में प्रकाशित नारे को विश्वसनीयता से देखा जाने लगा है।

 

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