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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कद मोदी सरकार में हमेशा से ही महत्वपूर्ण और पुराने भाजपाई नेताओं के मुकाबिल ऊंचा रहा है। केंद्र में दोबारा बनी मोदी सरकार में चार दर्जन के करीब पुराने भाजपाइयों को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा लेकिन डोभाल की स्थिति पहले के मुकाबिल ज्यादा मजबूत हुई। उन्हें न केवल कैबिनेट मंत्री का दर्जा, बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई गई, बल्कि सरकार के हर बड़े फैसले में भी उनकी राय का महत्व बढ़ा है। सूत्रों की मानें तो गृहमंत्री अमित शाह के 370 अनुच्छेद को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो भागों में विभक्त करने के फैसले पर पीएमओ में एक राय नहीं थी। मामले को लटकता देख डोभाल शाह की मदद के लिए आगे बढ़े। उन्होंने पीएम को सलाह दी कि यदि अभी एक्शन नहीं लिया तो अमेरिका के तालिबान संग समझौते बाद जम्मू-कश्मीर में कुछ बड़ा कर पाना खासा मुश्किल हो जाएगा। डोभाल की राय में जैसे ही अमेरिकी सेना अफगानिस्तान छोड़ेगी, वहां मौजूद भाड़े के जेहादियों को पाकिस्तान, भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने लगेगा। इतना ही नहीं उसे तालिबान की अफगान सरकार से भी मदद मिलने लगेगी। प्रधानमंत्री को सलाह जंच गई। सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत और खुफिया एजेंसियों राॅ और आईबी ने भी पीएम को भरोसा दिया कि स्थितियां काबू में कर ली जाएंगी। इस तरह अनुच्छेद 370 और राज्य को दो केंद्र शासित राज्यों में बदलने का फैसला अमल में लाया गया।

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