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उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों चैतरफा दबाव में बताए जा रहे हैं। धामी को मुख्यमंत्री बना भाजपा आलाकमान ने एक बड़ा रिस्क लेने का साहस दिखाया। दरअसल दो दफे के विधायक धामी की बनिस्पत प्रदेश भाजपा भीतर कई बरसों का प्रशासनिक अनुभव वाले लगभग डेढ़ दर्जन नेता हैं। इनमें सरकार में शामिल सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, बंशीधर भगत, धन सिंह रावत, बिशन सिंह चुफाल से लेकर सांसद अजय भट्ट, अजय टम्टा, पूर्व सीएम निशंक का नाम समय-समय पर संभावित मुख्यमंत्री बतौर उछलता रहा है। तीरथ सिंह रावत के स्थान पर लेकिन पार्टी आलाकमान ने युवा विधायक धामी का चयन कर इन पुराने चावलों को खासा नाराज कर डाला। अनुशासन की डोर से बंधे ये नेता खुलकर तो विरोध नहीं कर पा रहे हैं किंतु सीएम धामी के लिए नाना प्रकार की समस्याएं पैदा करने से बाज नहीं आ रहे हैं। दो मंत्रियों ने पिछले दिनों अपने विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों की मलाईदार पदों में तैनाती कर सरकार की छिछालेदर करवा डाली है। गन्ना मंत्री यतीश्वरानंद एवं शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने यह काम किया है। एक अन्य भाजपा नेता पिछले दिनों मुख्यमंत्री आवास में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संग भिड़ गए। मामला इतना तूल पकड़ गया कि अधिकारी ने पूरे मामले की लिखित शिकायत केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय तक भेज डाली। सीएम के करीबी सूत्रों का दावा है कि इन सबसे हलकान सीएम ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। इस वरिष्ठ अधिकारी को सीएम आवास पर आने की मनाही कर दी गई है और इस प्रकरण से जुड़े भाजपा नेता को भी सीएम आवास से प्रतिबंधित कर दिया गया है। खबर यह भी है कि अपने निरंकुश मंत्रियों की बाबत एक विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही सीएम धामी पार्टी अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा को सौंपने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सीएम की इस रिपोर्ट को आधार बना आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार की जा रही प्रत्याशी सूची में कई सीटिंग विधायकों का टिकट कटने जा रहा है। खबर यह भी गर्म है कि 18 घंटे काम कर रहे धामी को पार्टी नेतृत्व ने किसी भी वरिष्ठ नेता के दबाव में नहीं आने के निर्देश दिए हैं।

येदियुरप्पा की सक्रियता से संशय में भाजपाhttps://thesundaypost.in/sargosian-chuckles/bjp-suspicious-of-yeddyurappas-activism/

 

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