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Sargosian / Chuckles

‘दिल्ली चार’ का समाप्त हुआ युग

भाजपा की अंदरूनी राजनीति में एक वक्त था जब लालकृष्ण आडवाणी के चेलों की खूब चला करती थी। इन चेलों को ‘डी-फोर’ कह पुकारा जाता था। अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू और अनंत कुमार इस चैकड़ी का हिस्सा थे। भाजपा के सभी दिग्गज इन चारों के आगे नतमस्तक रहा करते थे। लाल कृष्ण आडवाणी के पक्के समर्थक इन चारों की तूती पूरे संगठन में सुनी जाती थी। फिर आडवाणी युग का अंत हुआ और गुजरात लाॅबी पार्टी में असरदार हो गई। मोदी की पहली सरकार में ये चारों मंत्री तो बने, लेकिन असर पहले जैसा नहीं रहा। इस बार मोदी सरकार में इन चारों नेताओं का ना होना हालांकि अलग-अलग कारणों के चलते है, लेकिन भाजपा के आंतरिक सत्ता संघर्ष को समझने वाले इसे आडवाणी युग की, पूर्ण समाप्ति करार दे रहे हैं। अरुण जेटली और सुषमा स्वराज स्वास्थ्य कारणों के चलते इस सरकार का हिस्सा नहीं हैं, तो वेंकैया नायडू पहले ही उपराष्ट्रपति बन सत्ता के खेल से बाहर हो चले हैं। अनंत कुमार असमय ही मौत के आगोश में चले गए।

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