भले ही तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत ने 2019 के आम चुनाव में विपक्षी गठबंधन को मजबूती देने का काम किया हो, तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी की कांग्रेस से नाराजगी दूर होने का नाम नहीं ले रही। ममता ने इन तीनों राज्यों के नतीजों को भाजपा की हार करार देते हुए केंद्र सरकार पर आरबीआई, सीबीआई जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं को नष्ट करने का आरोप तो लगाया, लेकिन कांग्रेस पर वे कुछ भी बोलने से बचती रहीं। सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी के यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी संग तो बेहद मधुर रिश्ते हैं। लेकिन वे राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकारने को कतई तैयार नहीं। जब पिछले साल राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने तब ममता अकेली ऐसी बड़ी नेता थी जिन्होंने उन्हें बधाई तक देना गंवारा नहीं किया। हालांकि अब कांग्रेस की तीन राज्यों में वापसी के बाद ममता को मन मारकर ही सही कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल होना पड़ सकता है।

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