[gtranslate]
Sargosian / Chuckles

न्यायपालिका और केंद्र में जारी है टकराव

मोदी सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद से ही केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के मध्य रिश्ते तनावपूर्ण होने लगे थे। हालात इतने बिगड़े कि 12 जनवरी, 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए प्रेस काॅन्फ्रेंस कर ‘लोकतंत्र खतरे में है’ कह डाला था। हालांकि इन चार जजों में से एक न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के सुर मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद पूरी तरह बदल गए और रिटायर होने के साथ ही वे सरकार द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिए गए थे। जस्टिस गोगोई के बाद मुख्य न्यायाधीश बने शरद बोबडे के समय हालांकि सरकार और कोर्ट के मध्य गंभीर टकराव नहीं देखने को मिला लेकिन सुप्रीम कोर्ट में खाली पड़े पदों की नियुक्ति कालेजियम की सिफारिश अनुसार करने में केंद्र का रुख कोर्ट के विपरीत रहा। बोबडे के बाद मुख्य न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति एवी रमन्ना ने नौ जजों की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति संबंधी कालेजियम की सिफारिश केंद्र को भेजी जिन्हें तत्काल ही राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। इससे उम्मीद बंधी कि अब विभिन्न हाईकोर्टस में भी जजों के खाली पड़े पदों पर नियुक्ति जल्द हो जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने 68 नाम इन पदों में नियुक्ति के लिए केंद्र को भेजे हैं। इनमें 10 महिला जजों के नाम शामिल हैं। लेकिन एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी केंद्र सरकार ने इन नामों पर कोई एक्शन न लेकर एक बार फिर से सरकार और न्यायपालिका के संबंधों को लेकर नाना प्रकार की आशंकाओं को पैदा कर डाला है। दिल्ली के सत्ता गलियारों में पिछले कुछ दिनों के भीतर मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बीच दो बार हुई मुलाकातों को लेकर भी अफवाहों का बाजार गर्म है। कहा जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रपति से इसी मसले पर बातचीत की है। जानकारों का यह भी दावा है कि न्यायमूर्ति रमन्ना के तीखे तेवर सत्ता प्रतिष्ठान को सुहा नहीं रहे हैं इसलिए एक बारगी फिर से लोकतंत्र के दो स्तंभों के मध्य टकराव बढ़ने की आशंका प्रबल होने लगी है।

कांग्रेस के दांव से परेशान भाजपाhttps://thesundaypost.in/sargosian-chuckles/bjp-troubled-by-the-bets-of-congress/

You may also like

MERA DDDD DDD DD