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Sargosian / Chuckles

यूपी में ब्राह्मण बनाम ठाकुर का दौर

योगी आदित्यनाथ के राज में भले ही भाजपा के पास विधानसभा में प्रचंड बहुमत हो, जमीनी स्तर पर उसका परंपरागत वोट बैंक खिसकने लगा है। लंबे समय से पार्टी के समर्थक रहे ब्राह्मण समाज में इस बात को लेकर बेचैनी बढ़ने लगी कि योगीराज में ठाकुरों का वर्चस्व बढ़ रहा है। कुख्यात अपराधी विकास दुबे प्रकरण ने इस ब्राह्मण बनाम ठाकुर की जंग को हवा देने का काम किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक प्रदेश में ब्राह्मणों की उपेक्षा को लेकर अब खुलकर स्वीकारने लगा है। दशकों पहले जब यूपी के मुख्यमंत्री रहते विश्वनाथ प्रताप सिंह ने प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ मुहिम शुरू की थी तब उन पर भी ठाकुर जाति के अपराधियों को बचाने के आरोप लगे थे। प्रदेश में हालात आज ठीक वैसे ही हैं। योगी आदित्यनाथ की छवि ब्राह्मण विरोधी की है। यही कारण रहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर की सभी विधानसभा सीटों पर योगी का जादू चला था लेकिन ब्राह्मण बाहुल्य सीट चिल्लूपु से भाजपा प्रत्याशी हार गया था। भाजपा आलाकमान ने योगी की इस ब्राह्मण विरोधी छवि से चिंतित हो पिछले दिनों गोरखपुर के कद्दावर नेता शिवप्रताप शुक्ल को राज्यसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक बना संतुलन साधने का प्रयास किया है। एंटी योगी गुट के शुक्ला पिछली मोदी सरकार में वित्त राज्यमंत्री रहे हैं। इस बार उन्हें मंत्री नहीं बनाए जाने के पीछे योगी का हाथ होने की बात राजनीतिक गलियारों में खासी गूंजी थी। चर्चा जोरों पर है कि अब लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल में शुक्ला को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर पार्टी आलाकमान ने ब्राह्मणों को संतुष्ट करने के साथ ही योगी पर नकेल कसने की कवायद भी शुरू कर दी है।

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