प्रथम चरण का मतदान भारतीय जनता पार्टी के आत्मविश्वास को डिगाने वाला रहा है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश का माहौल बदला-बदला सा नजर आने लगा था। बुनियादी मुद्दों को दरकिनार कर भाजपा नेतृत्व राष्ट्रवाद के नाम पर अपनी राजनीतिक गोटियां फिट करने में जुट गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो एक चुनावी रैली में सीधे सेना के शहीदों का जिक्र करते हुए वोट मांग डाले। लेकिन 11 अप्रैल को 91 लोकसभा सीटों के लिए हुआ मतदान कुछ और ही इशारा कर रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव की बनिस्पत इस बार मतदान प्रतिशत कम रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भाजपा को कम मत मिलेंगे जबकि एक होकर लड़ रहे विपक्ष को फायदा रहेगा। खबर है कि पहले चरण के मतदान बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने रणनीति में बदलाव का फैसला लिया है। अब फोकस राष्ट्रवाद के साथ-साथ मोदी सरकार की उपलब्धियों पर भी रहेगा।

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