[gtranslate]

हर वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या को पद्म पुरस्कारों का एलान किया जाता है। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म पुरस्कारों से सम्मानित होने वालों की लिस्ट को मंजूरी दी। लिस्ट देख हर कोई हैरान रह गया। कारण इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का नाम शामिल होना था, जिन्हें 74वें गणतंत्र दिवस पर पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। ऐसे में कयास लगाए जाने लगे हैं कि इस सम्मान के पीछे भाजपा की क्या सियासत हो सकती है? कुछ ही महीने पहले सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव दुनिया को अलविदा कह गए थे। देश के पूर्व रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम रह चुके मुलायम सिंह यादव की देश की राजनीति में लंबे अर्से तक भारी प्रभाव रहा है। उनके जाने के बाद भी उनका सियासी प्रभाव कम नहीं हुआ है। इसी प्रभाव को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा दाव चला है। ऐसे में सवाल है कि मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण देने के पीछे भाजपा का सियासी दांव कितना गहरा है? दरअसल, केंद्र सरकार का यह दाव इतना मजबूत माना जा रहा है कि विपक्ष में बैठे अखिलेश यादव भी खुद उनका स्वागत कर रहे हैं। उनके पास इसके अलावा कोई और चारा भी नहीं है। लेकिन यह बात साफ है कि पद्म अवार्ड में अपने पिता का नाम देखकर अखिलेश यादव हैरान जरूर हुए होंगे। क्योंकि भाजपा से उन्हें इस बात की तनिक भी उम्मीद नहीं होगी। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि केंद्र में बैठी भाजपा ने यह कदम 2024 के चुनाव को देखते हुए उठाया है। यह बात तो साफ है कि अगले लोकसभा चुनाव में यादव वोट बेहद अहम होने वाले हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। मुलायम सिंह यादव की विरासत को अपने पाले में करने के लिए भाजपा का यह दांव कितना असरदार होगा यह 2024 के नतीजे ही बता पाएंगे।

You may also like

MERA DDDD DDD DD