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पांच राज्यों के चुनावों से ठीक पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों का इन राज्यों में एक्टिव होना भाजपा के बड़े संकट का परिचायक बन चुका है। 2014 के बाद से ही लगातार ऐसा देखने को मिलता आया है कि केंद्र सरकार की कुछ जांच एजेंसियां
भाजपा विरोधियों पर अपना शिकंजा कसने में अतिरेक उत्साह दिखाती हैं। विशेषकर सीबीआई, ईडी और इन्कमटैक्स विभाग पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं। पश्चिम बंगाल में कुछ ऐसा ही गत् वर्ष देखने को मिला था। वहां चुनावों के दौरान ममता बनर्जी के करीबियों पर इन एजेंसियों ने जमकर छापेमारी की थी। कोयला तस्करी के आरोपों की जांच का बहाना कर दीदी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को इन एजेंसियों ने खूब परेशान किया था। ममता लेकिन अलग मिट्टी की बनी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की इस कार्यवाही का जमकर लाभ उठा डाला। वे अपने मतदाताओं को यह समझाने में सफल रहीं कि जानबूझ कर उन्हें और उनके परिवार को निशाने पर लिया जा रहा है। नतीजा तृणमूल की जीत और भाजपा की करारी हार के रूप में सामने आया। अब ऐसा ही कुछ ये एजेंसियां उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो करती नजर आ रही हैं। खबर जोरों पर है कि इस दफे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को टारगेट किए जाने का दांव उल्टा पड़ गया है। दरअसल, कानपुर के जिस इत्र कारोबारी पीयूष जैन के यहां इन्कमटैक्स ने छापेमारी कर दो सौ करोड़ से ज्यादा का काला धन बरामद किया है उसके तार सपा से कम, भाजपा से कहीं ज्यादा बताए जा रहे हैं। चर्चा जोरों पर है कि गलत व्यापारी के यहां छापा डाला गया। पीयूष जैन को संघ और भाजपा का समर्थक बताया जा रहा है। ऐसा दावा करने वालों की मानें तो छापा ‘समाजवादी इत्र’ लाॅन्च करने वाले व्यापारी के यहां डाला जाना था। नामों की समानता के चलते इन्कमटैक्स को शायद कन्फ्यूजन हो गया। इस छापे के बाद खबर आने लगी कि पूरे प्रकरण को अब टैक्स चोरी का मामला बता पीयूष जैन को पकड़ी गई नकदी पर टैक्स वसूल कर छोड़ दिया जाएगा। मामला लेकिन तब तक मीडिया की सुर्खियां बन चुका था। इसलिए हाल-फिलहाल जैन जेल में है और भाजपा बैकफुट पर।

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