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भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बंगाल में मिली करारी हार को स्वीकार नहीं पा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की जी-तोड़ मेहनत, केंद्रीय जांच एजेंसियों का भरपूर सहारा, तृणमूल कांग्रेस में सेंधमारी आदि सब कुछ आजमाने के बाद भी पार्टी राज्य में सौ सीटों का आंकड़ा तक पार नहीं कर पाई। इस हार से तिलमिलाई पार्टी अब बंगाल के राज्यपाल को मोहरा बना ममता बनर्जी को घेरने में एक बार फिर से जुट गई है। ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण बाद राज्यपाल जगदीश धनखड़ ने तृणमूल के तीन विधायकों के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा दर्ज करने संबंधी सहमति पत्र दे डाला। इन तीनों विधायकों का नाम शारदा स्टिंग मामले में सामने आया था। 2016 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सामने आए इस स्टिंग ऑपरेशन पर कोलकाता हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद से ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब भाजपा की चुनावों में करारी हार के बाद राज्यपाल के इस कदम ने नाना प्रकार की चर्चाओं को जन्म दे डाला है। संविधान विशेषज्ञों के अनुसार राज्यपाल के पास विधायकों के खिलाफ इस प्रकार की संस्तुति का अधिकार है ही नहीं। यह अधिकार राज्य विधानसभा के अध्यक्ष का होता है।

जानकारों की मानें तो भाजपा किसी भी सूरत में ममता बनर्जी सरकार को अस्थिर करना चाहती है। यही कारण है कि चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य में हुई हिंसा की जांच के लिए केंद्र सरकार ने आनन-फानन में एक केंद्रीय दल कोलकाता रवाना कर डाला। साथ ही राज्यपाल से भी राज्य की कानून-व्यवस्था पर अपनी रिपोर्ट भेजने को कहा है। सूत्रों की मानें तो आने वाले समय में कोई न कोई आधार बना केंद्र येन-केन-प्रकारेण ममता सरकार को बर्खास्त करने का प्रयास अवश्य करेगा।

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