दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक सेवा विस्तार पर चल रहे थे। 31 जनवरी को उन्होंने रिटायर होना था, लेकिन केंद्र सरकार ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के चलते उन्हें एक माह का एक्सटेंशन दिया था। इस बीच उन्हें पोस्ट रिटायरमेंट किसी महत्वपूर्ण पद में बैठाए जाने की खबर दिल्ली के सत्ता गलियारों में घूम रही थी कि तभी राजधानी का एक बड़ा हिस्सा हिंसा की चपेट में आ गया। दिल्ली पुलिस पूरी तरह से इस हिंसा को रोक पाने में विफल रही। हाईकोर्ट ने तक पुलिस को जबरदस्त फटकार लगा डाली। इस सबके चलते पटनायक की खासी किरकिरी हो रही है।

इससे पहले जामिया और जेएनयू मामले को लेकर भी पटनायक पर सवाल उठ चुके हैं। सूत्रों का दावा है कि भले ही पटनायक की कार्यशैली पर लाख हो-हल्ला मच रहा हो, भाजपा नेतृत्व आज नहीं तो कल, उन्हें कोई न कोई जिम्मेदारी देगा जरूर। इस बीच चौतरफा आलोचना का शिकार हो रहे पटनायक खासे व्यथित हैं कि केंद्र सरकार ने उनके रहते दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी अपरोक्ष रूप से स्पेशल कमिश्नर श्रीवास्तव को सौंप दी।

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