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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के हाथों मिली करारी हार से तिलमिलाई भाजपा ने अब राजभवन को अपनी शरणस्थली बना डाला है। प्रदेश के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और ममता बनर्जी सरकार के मध्य रिश्ते पहले से ही खासा तनावपूर्ण थे। तीसरी बार ममता के सीएम बनने के साथ ही ये रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो चले हैं। राज्यपाल धनखड़ का तृणमूल के विधायकों के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक शिष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो चला है। सीबीआई द्वारा दो मंत्रियों समेत चार विधायकों को गिरफ्तार किए जाने से आक्रोशित तृणमूल नेताओं ने राज्यपाल के खिलाफ अमर्यादित बयान जारी करने शुरू कर दिए हैं तो दूसरी तरफ गवर्नर भी अपनी संवैधानिक मर्यादाओं का स्पष्ट उल्लंघन कर समानांतर सरकार चलाने की कोशिश करते साफ नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में तेजी से बिगड़ रहे राजनीतिक हालातों के लिए ममता सरकार से कहीं अधिक जिम्मेदार स्वयं राज्यपाल धनखड़ हैं जिन्होंने खुलकर भाजपा के एजेंडे पर काम करना शुरू कर डाला है। जानकारों का दावा है कि यदि यही हालात रहे तो गवर्नर ममता सरकार के खिलाफ ऐसी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज सकते हैं जिसको आधार बना केंद्र राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सके।

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