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भाजपा के मीडिया सेल का राष्ट्रीय कार्यभार संभाल रहे राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी इन दिनों उत्तराखण्ड स्थित विश्व विख्यात जिम कार्बेट नेशनल पार्क से जुड़े एक मसले में बुरी तरह फंस गए हैं। दरअसल राज्य की हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में राज्य सरकार को आदेश दिया है कि निजी रिजॉर्ट में पाले गए हाथियों को तत्काल सरकार मुक्त कराए। साथ ही कोर्ट ने पार्क में प्रतिदिन मात्र सौ गाड़ियों के प्रवेश करने संबंधी निर्णय भी सुनाया है। निजी वाहनों पर शत-प्रतिशत प्रतिबंध लगा दिया गया है। कोर्ट के इस आदेश से पर्यटन व्यवसायी  संकट में आ गए है। कोर्ट ने यह आदेश एक्टिविस्ट मयंक मैनाली की याचिका पर सुनाया। लेकिन उनकी याचिका के संग कोर्ट ने बलूनी की बरसों पहले दायर एक याचिका को भी समाहित कर दिया जिसके चलते पूरे क्षेत्र में इस आदेश के लिए बलूनी को जिम्मेदार माना जाने लगा है। अब बेचारे बलूनी मीडिया के अपने मित्रों को संपर्क कर इस भ्रम को दूर करने का अनुरोध करते फिर रहे हैं।

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