भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह राजनीतिक जोड़-तोड़ के माहिर माने जाते हैं। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से लगातार भाजपा की सरकारें राज्यों में बनती जा रही हैं। अगले लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के महागठबंधन की काट के लिए अब शाह ने तीसरे मोर्चे को तैयार करना शुरू कर दिया है। यह मोर्चा यूं तो चुनावी समर में भाजपा के खिलाफ मैदान में उतरेगा। लेकिन इसका असल काम विपक्ष के महागठबंधन की राह में ‘वोट काटवा’ बनने का रहेगा। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से हो चुकी है। जहां सपा नेता शिवपाल यादव ने अलग दल बनाने का ऐलान कर दिया है। जाहिर है शिवपाल के प्रत्याशी सपा के परंपरागत यादव वोट बैंक पर ही डाका डालेंगे। इसी प्रकार शंकर सिंह बाघेला गुजरात में अलग से दल बना चुनाव लड़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को होगा। बसपा प्रमुख मायावती यूं तो सपा संग गठबंधन का ऐलान कर चुकी हैं लेकिन उनके ताजा बयान विपक्षी एकता पर खतरे के घंटी समान हैं। छत्तीसगढ़ में मायावती ने कांग्रेस के बजाए अजीत जोगी संग गठबंधन का ऐलान कर दिया है। मध्य प्रदेश में भी वे अकेले दम पर चुनाव लड़ने जा रही हैं। हरियाणा में बसपा ने चौटाला की पार्टी संग हाथ मिला कांग्रेस के लिए बड़ी समस्या पैदा कर दी है। खबर है कि सीटों का सही बंटवारा ना होने का बहाना बना बहिन जी आखिरी समय में उत्तर प्रदेश में भी खुद के दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर सकती हैं। जाहिर है इस सबका बड़ा फायदा भाजपा को ही मिलेगा।

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