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NDA के सहयोगी दलों में अब केंद्र सरकार की नीतियों से बढ़ रही है बेचैनी

एनडीए के सहयोगी दलों में अब केंद्र सरकार की नीतियों के चलते बेचैनी बढ़ने लगी है। दिल्ली में पिछले दिनों हुई बड़े स्तर की आगजनी के बाद अब भाजपा के सहयोगियों ने राष्ट्रीय नागरिकता कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी चुप्पी तोड़नी शुरू कर दी है।

राजधानी दिल्ली की पुलिस से खफा शिरोमणी अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल ने गृहमंत्री को पत्र लिख अपनी चिंता जताई है तो जद(यू) के महासचिव केसी त्यागी ने सीधे-सीधे भाजपा नेता कपिल मिश्रा को इन दंगों का आरोपी बता डाला है।

इस बीच बिहार के सीएम नीतीश कुमार का बगैर भाजपा को विश्वास में लिए राज्य में एनपीआर लागू न करने का ऐलान दोनों दलों के गठबंधन पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा चुका है।

खबर है कि नीतीश कुमार अब वापस यूपीए गठबंधन में वापसी का रास्ता तलाश लगे हैं, तो दूसरी तरफ दक्षिण में भाजपा की सहयोगी अन्ना द्रमुक ने भी एनडीए से दूरी बनानी शुरू कर दी है। खबर यह भी है कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा दिनोंदिन बढ़ रही ऐसी परेशानियों चलते खासे टेंशन में आ चुके हैं।

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