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उत्तर प्रदेश में सत्ता पाने से वंचित रह गए अखिलेश यादव की दिक्कतें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। समाजवादी पार्टी के मजबूत नेता और मुलायम सिंह यादव के खासे विश्वस्त रहे आज़म खान लंबे अर्से से जेल में हैं। आज़म के समर्थकों ने अखिलेश का खुला निशाना साधते हुए कह डाला है कि अखिलेश आज़म खान के जरिए मुसलमानों का वोट तो चाहते हैं लेकिन बदले में उनकी मदद करने का कोई प्रयास नहीं करते हैं। राजनीतिक पंड़ितों का मानना है कि आज़म खान के बेहद करीबी सपा नेता फसाहत अली खान का अखिलेश को सीधा टारगेट करना दर्शाता है कि ऐसा आज़म खान के इशारे पर और सोच समझ कर किया जा रहा है। फसाहत अली के बयान से सकते में आई समाजवादी पार्टी रिएक्ट कर पाती कि शिवपाल यादव ने अखिलेश के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। शिवपाल पहले तो सीतापुर जेल में बंद आज़म खान से मिलने यकायक ही पहुंच गए। एक लंबी मुलाकात बाद बाहर निकल उन्होंने सीधे अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए मीडिया से कह डाला कि ‘आज़म खान के पक्ष में सपा को आंदोलन करना चाहिए था। स्वयं मुलायम सिंह यादव को आज़म की बाबत प्रधानमंत्री को बताना चाहिए था। प्रधानमंत्री नेताजी की बहुत इज्जत करते हैं। यदि नेताजी कहते तो पीएम अवश्य कुछ न कुछ करते। सपा नेतृत्व ने लेकिन उनके लिए कुछ किया नहीं।’ पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर कि क्या वे और आज़म खान भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। शिवपाल ने सीधे जवाब न देते हुए कह डाला कि ‘अभी इसका वक्त नहीं आया है। पहले आज़म खान जेल से बाहर आ जाएं फिर इस पर निर्णय लिया जाएगा।’ सपा सूत्रों की माने तो पार्टी भीतर शिवपाल के इस जवाब बाद खासी घबराहट का माहौल है। ज्यादातर पुराने नेताओं का मानना है कि अखिलेश यादव को सीतापुर जाकर आज़म खान से बातचीत करनी चाहिए लेकिन ऐसे नेताओं की सलाह अखिलेश को नहीं सुहा रही है। दरअसल अखिलेश के रिश्ते कभी भी मुलायम सिंह के करीबी रहे नेताओं संग सहज नहीं रहे हैं फिर चाहे वह शिवपाल यादव हों, अमर सिंह रहे हों या फिर आज़म खान हों। ऐसे में खबर गर्म है कि अपनी कानूनी दिक्कतों से निजात पाने के लिए आज़म खान भाजपा के आगे कभी भी सरेंडर कर सकते हैं।

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