कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी संगठन को दुरुस्त करने में इन दिनों जुटे हुए हैं। वे लगातार ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में बदलाव करते जा रहे हैं। राहुल को करीब से जानने वालों का अनुमान था कि टीम राहुल में ज्यादातर युवा चेहरों को तरजीह दी जाएगी। जनार्दन द्विवेदी, सीपी
जोशी और दिग्विजय सिंह की महासचिव पद से विदाई के बाद इस अनुमान को बल मिला था। राहुल लेकिन फूंक-फूंक कर कदम रखते नजर आ रहे हैं। उनकी टीम में हरीश रावत जैसे पुराने कांग्रेसियों को महत्वपूर्ण स्थान मिलना इस बात का संकेत था कि राहुल पुराने और नए  के बीच संतुलन साध रहे हैं। कांग्रेसियों को लेकिन सबसे बड़ा झटका अहमद पटेल को पार्टी कोषाध्यक्ष बनाए जाने पर लगा। ज्यादातर का अनुमान था कि वयोवृद्ध मोतीलाल वोहरा के स्थान पर राहुल के करीबी कनिष्क सिंह को बैठाया जाएगा। लेकिन उन्होंने अहमद पटेल को तरजीह दे इस बात की पुष्टि कर डाली कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के अति विश्वस्त पटेल को इग्नौर करना संभव नहीं। पटेल के उद्योगपतियों से करीबी संबंध और उनका अनुभव कनिष्क सिंह पर भारी पड़ा। इस बीच भाजपा सरकार के कथित भ्रष्टाचार पर राहुल गांधी ने देशव्यापी अभियान छेड़ने के लिए जो कमेटी गठित की है उसमें भी नए और पुराने का संतुलन साधा गया है। इस कमेटी में जयपाल रेड्डी, शक्ति सिंह गोहिल और अर्जुन मोधवाडिया के संग प्रियंका चतुर्वेदी, पवन खेड़ा और जयवीर शेरगिल जैसे नए चेहरे भी शामिल किए गए हैं।

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