भले ही हरियाणा के सीएम ‘अबकी बार पचहत्तर पार’ के नारे के सहारे चुनाव मैदान में पार्टी को उतार चुके हों, भले ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के हाल-बेहाल हों, भाजपा के लिए इन चुनावों में कम से कम 39 सीटें संकट का कारण बनती नजर आ रही हैं। 90 सीटों वाली विधानसभा में 21 सीटें ऐसी हैं जिनमें भाजपा ने पहली बार 2014 के चुनावों में जीत हासिल की है। मई में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान भी हालांकि मोदी लहर के चलते पार्टी सभी दस लोकसभा सीटें जीत पाने में सफल रही थी, बाद में आए विधानसभावार आकड़ों में सात ऐसी विधानसभा सीटें थी जिनमें भाजपा तीसरे नंबर पर रही। इनमें वे विधानसभा सीट शामिल हैं जहां से खट्टर सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश धनकड़ एक बार फिर मैदान में हैं। दूसरे मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की सीट नारनोड में भी भाजपा तीन हजार मतों से पीछे रही थी। रोहतक लोकसभा सीट से भले ही कांग्रेस प्रत्याशी दिपेन्द्रर हुड्डा मामूली मतों से भाजपा प्रत्याशी से हार गए लेकिन नौ विधानसभा सीटों में से पांच में कांग्रेस आगे रही थी। चर्चा है कि भाजपा ने इस बार हरियाणा में टिकट वितरण से पहले दो सर्वे कराए हैं। पहला सर्वे मुख्यमंत्री खट्टर ने तो दूसरा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने। सूत्रों की मानें तो खट्टर के सर्वे में पार्टी को पचपन सीटें मिली हैं, वहीं अमित शाह द्वारा कराए सर्वे में आंकड़ा पचास से नीचे है। यही कारण है भाजपा आलाकमान ने इन चुनावों की बागडोर पूरी तरह अपने हाथों में रखी है।
आसान नहीं है पचहत्तर पार को पाना

