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सोरेन के निशाने पर भाजपा

भाजपा के लिए एक बड़ा सिरदर्द झारखण्ड में अगले वर्ष के विधानसभा चुनाव हैं। महाराष्ट्र में जो काम कांग्रेस के साथ ताल मेल कर शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने करा, वहीं काम झारखण्ड में ‘झारखण्ड मुक्ति मोर्चा’ के हेमंत सोरेन करने जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर पार्टी के विधायकों के भाजपा में चले जाने से बौखलाए हेमंत भी कांग्रेस संग गठबंधन की तैयारी में जुटे हैं। दरअसल, शरद पवार पर भारी दबाव था कि इस बार विधानसभा में कांग्रेस को कम सीटें गठबंधन में मिले। कारण हालिया संपन्न लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस का मात्र एक सीट जीतना था। एनसीपी ने चार सीटें इन चुनावों में जीती हैं। पवार ने लेकिन कांग्रेस को पूरी तरजीह दी ताकि भाजपा विरोधी वोट बिखरने न पाए। महाराष्ट्र में भी भाजपा ने शरद पवार की पार्टी के कई नेताओं को चुनाव पूर्व अपनी तरफ मिला लिया था, लेकिन राकपा का प्रदर्शन खासा बेहतर रहा। इसी तर्ज पर अब कांग्रेस हेमंत सोरेन और बाबू लाल मरांडी संग गठबंधन कर झारखण्ड से भाजपा की विदाई का लक्ष्य बना चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन हुआ तो भाजपा झारखण्ड में सत्ता से बाहर हो सकती है।

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