झारखण्ड के सीएम रघुवर दास भी जल्द ही पूर्व मुख्यमंत्रियों की सूची में अपना नाम दर्ज कराते नजर आ रहे हैं। राज्य विधानसभा चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके हैं। इस चुनाव में 20 साल तक भाजपा की सहयोगी रही तीन पार्टियों का गठबंधन से अलग होना पार्टी के लिए सत्ता से बाहर होने का एक बड़ा कारण बन सकता है। इस बार एनडीए के घटक दल जद(यू), लोकजनशक्ति पार्टी और ऑल झारखण्ड स्टूडेंट यूनियन गठबंधन से अलग हो चुनाव लड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस हेमंत सोरेन की जेएमएम और राजद संग तालमेल कर चुनाव मैदान में है। जानकारों की माने तो रघुवर दास की कार्यशैली से भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। अहंकारी स्वभाव के रघुवर दास को प्रदेश भाजपा और आरएसएस नेतृत्व इन चुनावों में बतौर सीएम प्रोजेक्ट नहीं करना चाह रहा था, लेकिन पीएम मोदी ने पहले चरण के चुनाव प्रचार में रघुवर दास को ही अगली सरकार में सीएम बनाए जाने की बात कह डाली। प्रदेश भाजपा में इसके चलते खासी नाराजगी है। अब दो चरणों के बाद यह बात साफ हो उभर गई है कि संघ और पार्टी का कैडर पूरी ऊर्जा से चुनाव नहीं लड़ रहा है।

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